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चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ ठीक होने के 5 दिन बाद तक à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ रहता है वायरस, बीमारी से सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ हà¥à¤† वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ फैला सकता है संकà¥à¤°à¤®à¤£
जो मचà¥à¤›à¤° येलो फीवर के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° हैं, वे ही चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ फैलाते हैं. इस बà¥à¤–ार के लकà¥à¤·à¤£ डेंगू से बहà¥à¤¤ मेल खाते हैं और इसमें होने वाला जॉइंट पेन ठीक होने में लंबा समय लेता है.
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤• वायरल डिजीज है, जो मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ के काटने से फैलती है. आमतौर पर यह बीमारी मॉनसून में फैलती है लेकिन आज के समय में मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤•ोप अकà¥à¤¸à¤° बना रहता है. इसलिठअनà¥à¤¯ सीजन में à¤à¥€ इसके केस आते रहते हैं. डेंगू और मलेरिया की तरह चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ à¤à¤• बà¥à¤–ार है और यदि समय पर सही उपचार ना मिले तो यह जानलेवा à¤à¥€ साबित हो सकता है. किन मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ के काटने से चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ फैलता है और इसका असर कितने दिन तक रहता है, इससे बचाव के उपाय कà¥à¤¯à¤¾ हैं (chikungunya Prevention Tips) और उपचार की विधि कà¥à¤¯à¤¾ है, इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ सवालों से संबंधित जानकारी आपको यहां दी जा रही है...
कितने दिन रहता है चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का बà¥à¤–ार?
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ आमतौर पर 2 से 3 दिन रहता है. इसके बाद बà¥à¤–ार कम हो जाता है या पूरी तरह ठीक हो जाता है. लेकिन संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हà¥à¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर में इसका वायरस करीब 7 दिन तक रहता है. यानी बीमारी ठीक होने के बाद à¤à¥€ वायरस à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ रहता है. à¤à¤¸à¥‡ में यदि इस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को मचà¥à¤›à¤° काट लें तो वे à¤à¥€ इस वायरस से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हो जाते हैं और फिर अनà¥à¤¯ लोगों को काटकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ कर सकते हैं.
किस मचà¥à¤›à¤° के काटने से होता है चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾?
à¤à¤¡à¥€à¤œ à¤à¤œà¤¿à¤ªà¥à¤Ÿà¥€ और à¤à¤¡à¥€à¤œ à¤à¤²à¥à¤¬à¥‹à¤ªà¤¿à¤•à¥à¤Ÿà¤¸ (Aedes aegypti and Aedes Albopictus) इन दो मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ के कारण चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ फैलता है. हालांकि इन मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ से येलो फीवर à¤à¥€ फैलता है. इसलिठइनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ येलो फीवर मॉसà¥à¤•िटो à¤à¥€ कहा जाता है. चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£ डेंगू से बहà¥à¤¤ अधिक मिलते हैं. इसलिठजिन à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में डेंगू और चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ दोनों ही बà¥à¤–ार फैलते हैं वहां कई बार यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ हो जाती है कि बीमारी मिस डायगà¥à¤¨à¥‰à¤œ हो जाती है. इसलिठइसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ होना बहà¥à¤¤ जरूरी है.
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£
तेज बà¥à¤–ार
जोड़ों में दरà¥à¤¦
तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर रैशेज
बहà¥à¤¤ अधिक थकान
मितली आना
हाथ, पैर और उंगलियों के जॉइंटà¥à¤¸ में सूजन
पेट और पाचन से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚
कà¥à¤› लोगों में आंखों और हारà¥à¤Ÿ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ हो सकती हैं.
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का इलाज
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के वायरस से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ मचà¥à¤›à¤•र के काटने के 2 से 7 दिन के अंदर यह वायरस शरीर पर हावी हो जाता है और फीवर के साथ ही जॉइंटà¥à¤¸ पेन का कारण बनता है. इस फीवर की बात करें तो इसे रोकने के लिठकोई à¤à¥€ à¤à¤‚टिवायल दवाई नहीं है और 2 से 3 दिन की अंदर यह बà¥à¤–ार खà¥à¤¦ ही ठीक हो जाता है. शरीर को आराम देने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ दवाà¤à¤‚ देते हैं, जिनसे रोगी की पीड़ा कम हो सके. जैसे, नेपà¥à¤°à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤¨ और पैरासिटामोल.
जॉइंटà¥à¤¸ में होने वाला पेन हमारे लिठतकलीफ देने वाला जरूर होता है लेकिन ये घातक नहीं होता है. बलà¥à¤•ि यह हमारे शरीर की रोगपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ वायरस पर किठजाने वाले अटैक के कारण होता है. फीवर ठीक होने के बाद और वायरस के शरीर में रहने का समय पूरा होने के बाद à¤à¥€ कई बार इस दरà¥à¤¦ को ठीक होने में लंबा समय लग जाता है. कà¥à¤› केसेज में महीनों तक यह दरà¥à¤¦ बना रह सकता है. इसलिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° की सà¥à¤à¤¾à¤ˆ दवाओं का सेवन करें और परेशान ना हों.
जोड़ों में सूजन की समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ इस बà¥à¤–ार के दौरान हो जाती है. à¤à¤¸à¤¾ à¤à¤Ÿà¤¿à¤‚बॉडीज के à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ होने से होता है. कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि ये जोड़ों में मौजूद कारà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¥‡à¤œ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती हैं और सूजन आ जाती है.
इसी तरह रैशेज, थकान, पेट संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ दवाओं और सही डायट के सेवन से दूर हो जाती हैं. आप परेशान होने या घबराने की जगह डॉकà¥à¤Ÿà¤° के मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ में अपना इलाज कराà¤à¤‚, जलà¥à¤¦à¥€ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ हो जाà¤à¤‚गे.
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